-
990
छात्र -
844
छात्राएं -
50
कर्मचारीशैक्षिक: 46
गैर-शैक्षिक: 4
परिकल्पना
- के. वि. सं. उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक प्रयासों के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अपने छात्रों को ज्ञान/मूल्य प्रदान करने और उनकी प्रतिभा, उत्साह और रचनात्मकता का पोषण करने में विश्वास रखता है।
उद्देश्य
- शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना है।
- स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने और गति निर्धारित करने के लिए।
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) आदि जैसे अन्य निकायों के सहयोग से शिक्षा में प्रयोग और नवाचारों को शुरू करना और बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करना और बच्चों में “भारतीयता” की भावना पैदा करना।

विद्यालय के बारे में
उत्पत्ति
हमारा विद्यालय वर्ष 1981 में शुरू किया गया था और अब यह चेन्नई जिला, तमिलनाडु राज्य के 14 विद्यालयों में से एक है। यह विद्यालय केवीएस चेन्नई क्षेत्र में रक्षा...
विद्यालय के दृष्टिकोण के बारे में
शिक्षा के एक आम कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और पैरा-सैन्य कर्मियों सहित हस्तांतरणीय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए;...
विद्यालय के उद्देश्य के बारे में
शिक्षा के एक आम कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और पैरा-सैन्य कर्मियों सहित हस्तांतरणीय केंद्र सरकार के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए;...
संदेश
श्री विकास गुप्ता, भा. प्र. से., आयुक्त
प्रिय विद्यार्थीगण, शिक्षकवृंद एवं अभिभावकगण,
केन्द्रीय विद्यालय संगठन के स्थापना दिवस–2025 पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
केन्द्रीय विद्यालय संगठन की असाधारण यात्रा, जिसकी शुरुआत 1963 में मात्र 20 रेजिमेंटल स्कूलों से हुई थी, आज 1289 केन्द्रीय विद्यालयों की विशाल श्रृंखला में विकसित हो चुकी है, जो उत्कृष्ट शिक्षा की ज्योति से राष्ट्र को आलोकित कर रही है।
श्री. डॉ. आर. सेंदिलकुमार
उप आयुक्त
नालंदा और तक्षशिला से लेकर वर्तमान शैक्षिक व्यवस्था तक का भारतवर्ष के हजारों सालों की परंपरा और संस्कृति ने सदैव शिक्षा को एक ऐसे औजार के रूप में स्वीकारा है जिससे मनुष्य अपने को सामाजिक, सुसभ्य और मानवीय बनाता है। केंद्रीय विद्यालय संगठन भारत के इस घनी परंपरा का वह मशालवाहक है, जो शिक्षा के क्षेत्र में युगीन परंपराओं को आत्मसात करते हुए आधुनिक युग के शैक्षिक नवाचरों से देश की नई पीढ़ी के निर्माण के दायित्वपूर्ण कार्य का सफलतापूर्वक निर्वाह करते आए हैं। देश के नीव को सुदृढ़ और सुसंगत बनाने की इस तपस्या को सार्थकता देनेवाले असंख्य शिक्षक ही संगठन की आन और शान है।
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जसवंत मारवारी
प्राचार्य
इक्कीसवीं सदी की शिक्षा, अकादमिक उत्कृष्टता की खोज से कहीं बढ़कर है। यह युवा मन को स्पष्ट रूप से सोचने, खुद को अभिव्यक्त करने, एक साथ काम करने और देखभाल व रचनात्मकता दिखाने के लिए मार्गदर्शन करने के बारे में है। हमारे विद्यालय में, हम छात्रों को न केवल परीक्षाओं के लिए, बल्कि जीवन के लिए भी तैयार करने में मदद करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इस बदलती दुनिया में, हमारा लक्ष्य 21वीं सदी के प्रमुख कौशल—आलोचनात्मक सोच, संचार, सहयोग और रचनात्मकता—का विकास करना है ताकि हर बच्चा एक आत्मविश्वासी, ज़िम्मेदार और नवोन्मेषी वैश्विक नागरिक बन सके। हम जिज्ञासा को प्रोत्साहित करते हैं, विभिन्न विचारों का स्वागत करते हैं और सीखने को एक आनंददायक अनुभव बनाते हैं। शिक्षक और अभिभावक विकास की इस यात्रा में हमारे साथ चलते हैं। हम आशा करते हैं कि हमारे छात्र न केवल ज्ञानवान बनें, बल्कि दयालु, लचीले और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए तैयार भी हों। आइए हम युवा मन को एक उज्जवल भविष्य की ओर ले जाने के लिए शिक्षा देते रहें, सृजन करते रहें और प्रेरित करते रहें।
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